दैनिक भास्कर ने 4 दिन तक पाठकों से 'वे मतदान किस आधार पर करते हैं? प्रत्याशियों के वायदों पर कितना ऐतबार करते हैं?' इसको लेकर सवाल पूछे। इसमें 4950 पाठकों ने एसएमएस और ई-मेल के जरिए अपने जवाब भेजे। इसमें 67% लोग जहां प्रत्याशी की कार्यशैली से प्रभावित दिखे, वहीं 7%लोग भाषण के तरीके से भी प्रभावित होते हैं। प्रत्याशी की सामाजिक और आर्थिक हैसियत भी वोटिंग के समय लोगों के जेहन में रहती है।
इसीलिए, हर बड़े नेता का अलग है भाषण का अंदाज
खमा घणी और राम-राम सा से हर भाषण की शुरुआत। किस्सागोई तो कभी फिल्मी अंदाज में अपनी पुरानी गलतियां स्वीकार करना। कभी शूटिंग, क्रिकेट या मैनेजमेंट के फंडों को जनसभाओं के बीच समझाना। उम्मीदवारों का स्पीच क्राफ्ट या भाषण देने का अंदाज में कुछ ऐसी बातें भी होती हैं जो चर्चा का विषय बन जाती हैं।
खमा घणी और राम-राम सा से हर भाषण की शुरुआत। किस्सागोई तो कभी फिल्मी अंदाज में अपनी पुरानी गलतियां स्वीकार करना। कभी शूटिंग, क्रिकेट या मैनेजमेंट के फंडों को जनसभाओं के बीच समझाना। उम्मीदवारों का स्पीच क्राफ्ट या भाषण देने का अंदाज में कुछ ऐसी बातें भी होती हैं जो चर्चा का विषय बन जाती हैं।




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